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कहानी एक प्रोत्साहन की …

एक बार एक चिड़िया थी वह एक बहुत सुंदर से जंगल मे रहती थी । एक दिन किसी कारण से उस जंगल मे आग लग गयी। सारे पशु पक्षी खुद को बचाने के लिए इधर उधर भागने लगे।

अचानक एक बाज़ की नज़र उस नन्ही सी चिड़िया पर पड़ी। वह तालाब से पानी अपनी चोंच में उठा कर जंगल की आग में डाल रही थी।
ये देखने के बाद बाज़ से रहा नही गया और चिड़या को टोक दिया।
“चिड़िया तू पागल तो नही हो गयी है तेरी एक चोंच पानी से क्या ये आग बुझ जाएगी, इससे अच्छा है तू भी अपनी जिंदगी बचा ओर हमारे साथ निकल ले।”
चिड़िया ने बड़े सहज सब्दो में जवाब दिया “मुझे नही पता मेरी एक चोंच पानी से ये आग बुझ पाएगी या नही पर जब भी इस आग की बात चलेगी मेरी गिनती आग बुझाने वालो में होगी और आपकी भागने वालो में।”

Chondestes grammicus. Guajolota Ranch. slide # 00662-00508.

मायने नही रखता आप कितने बड़े है ये कितने छोटे, मायने रखता है आप काम कैसे करते है कब करते है और किसके लिए करते है।
आपका कद नही बताता आप क्या कर सकते हैं आपका हौसला ओर काम करने का जुनून बताता है आप क्या कर सकते हैं,

यह कहानी काफी हद तक हमारे जीवन से भी जुड़ी है।
जातिवाद,धर्मवाद,छेत्रवाद, बिगड़ता पर्यावरण, बढ़ाता हुआ प्रदूषण, मिटती हुई सभ्यता नामक आग हमारे समाज रूपी जंगल मे लगी हुई है।
अब हमारा कर्तव्य ओर धर्म ये ही है कि इसको बुझाने के लिए काम से कम चिड़िया की चोंच जितना योगदान करें।
क्योंकि जब जब इस बढ़ती आग का जिक्र होगा बहुत से लोगो का नाम इसको बुझाने में योगदान में लिया जाएगा। और कुछ लोगो का भाग जाने में।
बिगड़ती हुई परस्तिथियों से भागना या दूरी बना लेना सबसे आसान काम है। और हर कोई इसको आसानी से कर सकता है। लेकिन इसको संभालना ओर सुधारना एक हौसले का काम है।

सरदार भगत सिंह ( मेरे साथ बहुत लोगो के आदर्श) की कहानी भी चिड़िया जैसी ही है।
जब उनको अंग्रेजों ने फांसी पर चढ़ा दिया तब तक देश को आजादी नही मिली थी।
पर आज जब भी आजादी की कहानियों सुनाई जाती है तो सरदार भगतसिंह का नाम बड़े आदर के साथ लिया जाता था।
उनको नही पता था उनके बलिदान से आजादी मिलेगी या नही पर उनको पता है जहाँ भी आजादी के गीत गाये जाएंगे वहाँ उनका नाम लिया जाएगा।

एक ओर थे हमारे डॉ. अब्दुल कलाम जिन्होंने हमारे देश को दुनिया की महाशक्ति बनने के लिए कोसिस की ओर जिंदगी भर काम किया,
वो जब तक रहे हमारा देश महाशक्ति नही बन पाया पर अब हमारा देश विश्व की महाशक्ति बनने की दिशा में बहुत तेजी से आगे बढ़ रहा है। कल जब हमारा देश महाशक्ति बन जायेगा। और इसके बारे में बात की जाएगी तो डॉ. अब्दुल कलाम का नाम बड़े आदर के साथ लिया जाएगा।

ऐसा नही है इन लोगो ने किसी असाधारण सक्ति के साथ जन्म लिया था। पर इन लोगो हौसले चिड़िया जैसे बुलंद थे। इसलिए आज उनका नाम इज़्ज़त के साथ आग बुझाने वालो में लिया जाता है।
चलो एक सुरूआत करते है एक कोशिस के लिए हमारे समाज आप पास जो आग लगी उसको बुझाने की
धन्यवाद

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